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निजी अस्पतालों पर आश्रित है देश के बुजुर्गों की सेहत

health Capsule

नई दिल्ली । भले ही इन दिनों निजी अस्पताल विवादों के दौर से गुजर रहे हों, लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू यह है कि आधे से ज्यादा बुजुर्ग आज भी इलाज के लिए सरकारी की बजाए निजी अस्पतालों पर भरोसा करते हैं। फिर भले ही यहां इलाज का खर्च सरकारी अस्पतालों से पांच गुना अधिक ही क्यों न हो। यह बात 71वें राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण के आंकड़ों को केंद्र में रखकर किए गए अध्ययन में सामने आई है। 

ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में हालात अलग नहीं हैं। ढलती उम्र में बुजुर्गों की देखभाल का मामला अधिक संवेदनशील हो जाता है क्योंकि आधे से अधिक बुजुर्गों को अपनी सेहत की देखभाल के लिए दूसरों पर आश्रित रहना पड़ता है। अध्ययन के लिए बुजुर्गों की बीमारी से संबंधित आंकड़े प्राप्त करने के लिए गत 15 दिनों में उनकी बीमारी और बीते एक साल के दौरान अस्पताल में भर्ती होने के मामलों को शामिल किया गया है। स्वास्थ्य की देखभाल में होने वाले खर्च संबंधी आंकड़ों में अस्पताल में भर्ती होने, निदान, डॉक्टरों की फीस, दवाइयों, बेड चार्ज और परिवहन समेत अन्य गैर-मेडिकल खर्चों को भी शामिल किया गया है।

सर्वेक्षण में इन्हें किया शामिल 

सर्वेक्षण में शामिल 27,245 बुजुर्गों में 50.3 फीसद पुरुष और 49.7 फीसद महिलाएं थीं। वहीं, 9.2 फीसद ग्रामीण और 8.4 फीसद शहरी बुजुर्गों की उम्र 80 वर्ष से अधिक थी और 57.4 फीसद बुजुर्ग निरक्षर थे।

यह आया सामने 

अध्ययन के दौरान पाया गया कि 30 फीसद से अधिक बुजुर्ग गत 15 दिनों से किसी बीमारी से पीड़ित थे, जबकि बीते एक साल के दौरान अस्पताल में भर्ती होने वाले बुजुर्गों की संख्या आठ प्रतिशत थी। 80 साल की उम्र के बुजुर्गों के बीमार होने का अनुपात भी कम उम्र के लोगों की अपेक्षा अधिक पाया गया है।

संपन्न लोग अधिक होते हैं बीमारियों का शिकार 

सर्वेक्षण में एक बात यह भी सामने आई है कि गरीबों की अपेक्षा संपन्न लोग बीमारियों का अधिक शिकार बनते हैं और अस्पतालों में भर्ती होने के मामले भी उनमें अधिक देखे गए हैं। यही नहीं, गरीब बुजुर्गों की अपेक्षा संपन्न वर्ग के बुजुर्ग अस्पताल में इलाज कराने के लिए तीन गुना अधिक खर्च करते हैं। शहरी क्षेत्रों के संपन्न बुजुर्गों के मामले में यह आंकड़ा 6.6 गुना और ग्रामीण बुजुर्गों के मामले में 1.9 गुना अधिक है। इससे स्पष्ट है कि निम्न आय वर्ग के बुजुर्गों को ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

बुजुर्गों की निर्भरता का अनुपात बढ़ा 

बुजुर्गों की निर्भरता का अनुपात वर्ष 1961 में 11 फीसद से बढ़कर वर्ष 2011 में 14 फीसद हो गया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि बुजुर्ग अपनी सेहत की देखभाल समेत अन्य जरूरतों के लिए दूसरों पर आश्रित हैं। राष्ट्रीय स्तर पर देखें तो 64 फीसद मामलों में बुजुर्ग निजी अस्पतालों और 35.9 फीसद मामलों में सरकारी अस्पतालों

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