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निजी अस्पतालों पर नकेल कसने के लिए समिति का गठन

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नई दिल्ली । शालीमार बाग स्थित मैक्स अस्पताल पर कार्रवाई के बाद अन्य निजी अस्पतालों पर निगरानी रखने के लिए दिल्ली सरकार ने नौ सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। समिति निजी अस्पतालों व नर्सिग होम्स से संबंधित शिकायतों की जांच करेगी। दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन से बुधवार को इसकी जानकारी दी। समिति प्रत्येक महीने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप देगी।

नौ सदस्यीय समिति के चेयरमैन आइएमए के अध्यक्ष केके अग्रवाल को बनाया गया है। वहीं, आइएमए व डीएमए से जुड़े चिकित्सक इसके सदस्य है। सरकार ने कमेटी से 31 दिसंबर तक रिपोर्ट पेश करने को कहा है। कमेटी अस्पतालों के व्यवहार पर भी रिपोर्ट तैयार करेगी। सभी अस्पतालों के रजिस्टरों की जांच की जाएगी। जैन के अनुसार निजी अस्पतालों के खिलाफ बड़े पैमाने पर शिकायतें मिल रही है। इसमें इलाज व दवाइयों की ज्यादा कीमत वसूलने, तुरंत मेडिकल सुविधा मुहैया कराने से मनाही, अस्पताल के भीतर दवा लेने के लिए मरीजों को मजूबर करने समेत लापरवाही व मनमानी से जुड़े मामले है। वहीं, 500 की दवा 3000 से ज्यादा कीमत में बेची जा रही है। इतना लाभ बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। केंद्र सरकार ने आवश्यक दवाइयों की सूची बनाई हुई है लेकिन उन दवाओं को नहीं लिखा जाता। उन्होंने कहा कि यह शिकायतें किसी एक अस्पताल या समय विशेष में नहीं मिली हैं बल्कि लोग नियमित तौर पर अलग-अलग अस्पतालों की शिकायतें करते है।

सरकार ने इस मसले पर चिकित्सकों के नियामक संगठनों आइएमए, डीएमए व डीएमसी समेत क्षेत्र विशेष के विशेषज्ञों से विस्तार से इस मसले पर चर्चा की। स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार दवाओं की कीमत तय करने नहीं जा रही है, लेकिन गैरवाजिब लाभ पर लगाम लगाने की सरकार की कोशिश है। उन्होंने कहा कि सरकार दिल्ली स्वास्थ्य कानून लेकर आ रही है। उम्मीद है कि अगले दो महीनों में इसकी घोषणा कर दी जाएगी।

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