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दिनभर रहती है थकान और सुस्ती? कहीं ये क्रॉनिक फैटीग सिंड्रोम का लक्षण तो नहीं

health Capsuleक्या आप कई महीनों से लगातार थका हुआ महसूस करते हैं और आप बीमार भी नहीं हैं? अगर ऐसा है, तो हो सकता है कि आप क्रॉनिक फैटीग सिंड्रोम के शिकार हों। इस सिंड्रोम से प्रभावित होने पर व्यक्ति लंबे समय से दिनभर थका हुआ महसूस करता है और आराम करने के बाद भी उसकी थकान कम नहीं होती है। चिकित्सीय जांच करवाने पर उसमें कोई रोग भी नहीं निकलता है। आमतौर पर जब कोई व्यक्ति 6 महीने से ज्यादा समय तक थकान महसूस करता है, तो उसे क्रॉनिक फैटीग सिंड्रोम का शिकार माना जाता है। आइए आपको बताते हैं क्या हैं क्रॉनिक फैटीग सिंड्रोम के लक्षण और कारण।

क्या हैं क्रॉनिक फैटीग सिंड्रोम के लक्षण

  • थोड़ी शारीरिक मेहनत के बाद 24 घंटे से अधिक समय तक बीमार महसूस करना
  • थकान के कारण सिरदर्द की समस्या
  • मांसपेशियों में लगातार दर्द होना
  • लगातार जोड़ों में दर्द होना
  • नींद न आना और सोने के बाद भी आलस लगना
  • याददाश्त की समस्या
  • गला खराब होना

    क्या है क्रॉनिक फैटीग सिंड्रोम का कारण

    कुछ लोगों में क्रॉनिक फैटीग सिंड्रोम के कारणों का पता चलता है जबकि ज्यादातर लोगों में अंजान कारणों से ये समस्या हो सकती है। शरीर में होने वाली कई तरह की बीमारियां और बदलाव इस तरह की थकान का कारण बन सकते हैं। आमतौर पर क्रॉनिक फैटीग के शिकार लोगों में ये कारण पाए जाते हैं-

    वायरल इंफेक्शन

    कई बार व्यक्ति को किसी तरह का वायरल इंफेक्शन हो जाने के बाद लंबे समय तक थकान की समस्या हो सकती है। दरअसल वायरल इंफेक्शन का कारण कुछ हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस होते हैं और यही वायरस क्रॉनिक फैटीग सिंड्रोम का कारण बन सकते हैं।

    इम्यून सिस्टम के कमजोर होने पर

    क्रॉनिक फैटीग सिंड्रोम का शिकार ऐसे लोग ज्यादा होते हैं, जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर होता है। इम्यून सिस्टम यानी प्रतिरक्षा तंत्र हमारे शरीर का ऐसा सिस्टम है, जो वायरस और बैक्टीरिया से लड़ने में शरीर की मदद करता है और शरीर की रक्षा करता है। लेकिन इस सिस्टम के कमजोर होने पर व्यक्ति को कई तरह की परेशानियां और रोग होने की संभावना बढ़ जाती है, जिनमें से एक क्रॉनिक फैटीग सिंड्रोम भी है।

    हार्मोनल असंतुलन के कारण

    क्रॉनिक फैटीग सिंड्रोम के शिकार कई लोगों में यह भी देखा गया है कि उनमें हार्मोनल असुंतलन पाया जाता है। ऐसे लोगो के हाइपोथेलेमस, पिट्यूट्री ग्लैंड या एड्रेनल ग्लैंड आमतौर पर हार्मोन्स का निर्माण ठीक से नहीं कर पाते हैं इसलिए ये समस्या होती है।

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