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त्वचा के धब्बे बन सकते हैं गंभीर मानसिक रोग का कारण, जानें क्यों और कैसे?

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स्किन में यदि धब्बे आ रहे हैं तो इससे दिमाग की बीमारी के बारे में पता चल सकता है। पीड्रियाट्रिक न्यूरोलॉजी की राष्ट्रीय कार्यशाला में रायपुर से आए पीड्रियाट्रिक न्यूरोलॉजिस्ट और आईएपी के नेशनल सेक्रेट्री डॉ. केपी साराभाई ने इसी तरह की महत्वपूर्ण जानकारियों अपने व्याख्यान में दी।

स्किन पर धब्बों से दिमाग की बीमारी

स्किन पर धब्बों से दिमाग में होने वाली बीमारियों का पता चल सकता है। इसे न्यूरो क्यूटेनियस सिंड्रोम कहते हैं। स्किन पर यदि सफेद धब्बे होते हैं तो इसे दिमागी फिट्स और मानसिक विकलांगता के संकेत मिलते हैं। हालांकि डॉक्टर्स कहते हैं कि इसका मतलब यह नहीं है कि स्किन में धब्बे होने का मतलब केवल दिमाग की बीमारी ही हो, बल्कि अन्य स्किन संबंधित बीमारियां भी हो सकती हैं, लेकिन यह दिमाग की बीमारियां होने के भी संकेत देते हैं। स्किन पर भूरे रंग के धब्बे आते हैं तो इसे न्यूरो फाइब्रोमेरोसिस कहते हैं इससे फिट्स, मानसिक बीमारियां होती हैं।

मनोरोग क्या हैं

मनोरोग किसी व्यक्ति के मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य की वह स्थिति होती है, जिसकी तुलना किसी स्वस्थ व्यक्ति से करने पर वह 'सामान्य' नहीं होती। स्वस्थ व्यक्तियों की तुलना में मनोरोगों से ग्रस्त किसी व्‍यक्ति का व्यवहार असामान्‍य अथवा दुरनुकूली (मैल एडेप्टिव) होता है। इन्हें मानसिक रोग, मनोविकार, मानसिक बीमारी अथवा मानसिक विकार के नाम से भी जाना जाता है। मनोरोग मस्तिष्क में रासायनिक असंतुलन होने के कारण होते हैं, तथा इनके उपचार के लिए मनोरोग चिकित्सा की आवश्यकता होती है।

मानसिक रोगों के कारण

मानसिक रोगों के कई जैसे जैविक, वातावरण जनित, मनोवैज्ञानिक व सामाजिक आदि कारण हो सकते हैं। इनमें से मुख्य कारण निम्न प्रकार से हैं।

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