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90 फीसदी स्कूली बच्चों की बॉटल व टिफिन घटिया क्वालिटी के

health Capsuleभोपाल। आप अपने बच्चों के लिए प्लास्टिक की बॉटल और टिफिन खरीद रहे हैं तो देख लें कि वह खाने-पीने की चीजें रखने लायक है या नहीं। ऐसा नहीं किया तो बच्चों को बड़े होने पर कई खतरनाक बीमारियां घेर सकती हैं। यहां तक की कैंसर जैसी बीमारी होने का डर भी है।
जीएमसी के प्रिवेंटिव सोशल मेडिसिन (पीएसएम) विभाग में हुई स्टडी में सामने आया है कि सिर्फ 10 फीसदी बच्चों की बॉटल व टिफिन का प्लास्टिक ही सुरक्षित श्रेणी का है। दो निजी स्कूलों के 300 बच्चों पर हुए अध्ययन में 78 फीसदी बच्चों ने कहा कि वे प्लास्टिक से होने वाले नुकसान के बारे में जानते हैं।
इसके बाद भी इसका उपयोग कर रहे हैं। हालांकि, इनमें एक भी छात्र प्लास्टिक में इस्तेमाल होने वाले नुकसानदेह तत्व बिस्फेनाल ए (बीपीए) के बारे में नहीं जानता था।सात अलग-अलग श्रेणी के प्लास्टिक में 10 फीसदी बच्चे ही सुरक्षित श्रेणी के प्लास्टिक ग्रेड-5 (पॉलीप्रोपीलीन) का उपयोग कर रहे थे। 30 फीसदी ग्रेड 1 प्लास्टिक की बॉटल व टिफिन उपयोग कर रहे हैं, जो सिर्फ एक बार उपयोग की जाती है। लंबे समय तक उपयोग के चलते 36 फीसदी बच्चों के टिफिन-बॉटल से प्लास्टिक का ग्रेड ही मिट गया था। 23 फीसदी की बॉटल-टिफिन में ग्रेडिंग ही नहीं थी।
एक फीसदी गे्रड-7 के प्लास्टिक उपयोग कर रहे थे। पीएसएम विभाग की स्टूडेंट डॉ. एंजेलिन प्रिया ने एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मंजू टोप्पो के निर्देशन में यह स्टडी की। डॉ. टोप्पो ने बताया कि खराब क्वालिटी के प्लास्टिक का उपयोग बंद कर बच्चों को कई बीमारियों से बचाया जा सकता है। माता-पिता व शिक्षकों को इसके प्रति जागरूक होना पड़ेगा।
अलग-अलग स्टडी में शरीर पर यह असर दिखा, अमेरिका में रोक
हार्मोन में बदलाव, ब्रेस्ट व प्रोस्टेट कैंसर, माहवारी में बदलाव, पुरुष-महिलाओं में संतानहीनता, मोटापा, टाइप 2 डायबिटीज, अलग-अलग तरह के कैंसर और सांस की बीमारियां। अलग-अलग स्टडी में इस तरह के असर दिखने के बाद यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने खान-पान के प्लास्टिक में बिस्फेनाल ए (बीपीए) के उपयोग पर रोक लगा दी है।
इस तरह की स्टडी
दो निजी स्कूलों के कक्षा 7, 8, 9 और 11 के 300 बच्चों की पानी की बोतल और टिफिन की जांच की गई। इसमें 56 फीसदी बच्चे टिफिन और बॉटल दोनों प्लास्टिक की उपयोग कर रहे थे। 37 फीसदी सिर्फ पानी की बॉटल प्लास्टिक की उपयोग कर रहे थे। सिर्फ 6 फीसदी ऐसे थे, जो प्लास्टिक उपयोग नहीं कर रहे थे।
सात ग्रेड की प्लास्टिक में यह हैं खतरनाक

रिसर्च में बताया गया है कि प्लास्टिक 7 ग्रेड की होती है। इसमें 2, 4, और 5 ग्रेड की प्लास्टिक खान-पान की चीजें रखने के लिए सुरक्षित मानी जाती है। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथारिटी ऑफ इंडिया के निर्देशों के अनुसार फूड ग्रेड प्लास्टिक में ग्रेड लिखना जरूरी है। ग्रेड 1 का प्लास्टिक बोतल बंद पानी में उपयोग होता है। यह सिर्फ एक बार के उपयोग के लिए होता है। ग्रेड, 1,3, 6 और 7 स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित नहीं माने जाते। लिहाजा, ग्रेड जरूर देखना चाहिए।
बीमारी का खतरा रहता है

प्लास्टिक कोई भी हो उसके तत्व धीरे-धीरे खाने-पीने की चीजों में आ जाते हैं। गरम चीजें डालना तो और खतरनाक है। लंबे समय तक प्लास्टिक के उपयोग से आंतो की बीमारी, एनीमिया, ब्लड कैंसर व दूसरे तरह के कैंसर होने का खतरा रहता है। 

-डॉ. अतुल समइया, कैंसर सर्जन, भोपाल

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