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जीटीबी अस्पताल में हाई कोर्ट की आपत्ति भी दरकिनार

health Capsuleनई दिल्ली।गुरु तेग बहादुर (जीटीबी) अस्पताल में दिल्ली के मतदाताओं के लिए 80 फीसद सुविधाएं आरक्षित करने वाली दिल्ली सरकार की योजना में बदलाव नहीं हुआ है, जबकि हाई कोर्ट ने बृहस्पतिवार को इस पर आपत्ति की थी। कोर्ट के सख्त रुख को देखते हुए दिल्ली सरकार के वकील ने साफ कहा था कि अस्पताल में सभी को इलाज मिलेगा। इसकी वजह से शुक्रवार को अस्पताल में कई बाहरी मरीज पहुंचे, लेकिन उन्हें कोई राहत नहीं मिली। न तो उन्हें जांच की सुविधा दी गई और न ही दवाएं। बाहरी मरीजों के रजिस्ट्रेशन के लिए 25 में से मात्र चार काउंटर ही छोड़े गए थे।
अस्पताल में पहुंचे मरीजों ने बताया कि दिल्ली का मतदाता पहचान पत्र दिखाने वालों की पर्ची सफेद है, जबकि बाहरी मरीजों के लिए नीले रंग की पर्ची बनाई जा रही है। जांच या दवा के केंद्र पर सुरक्षा गार्ड नीली पर्ची वालों को देखकर भगा दे रहे हैं। इस योजना की मार दिल्ली के उन लोगों पर भी पड़ी है, जिनके पास मतदाता पहचान पत्र नहीं है। इस मामले में कोर्ट में जनहित याचिका दायर करने वाले वकील अशोक अग्रवाल का कहना है कि दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा ने कोर्ट को गुमराह करने का काम किया है। मेहरा की टिप्पणी से यह स्पष्ट था कि योजना में बदलाव किया गया है, जबकि ऐसा कुछ नहीं हुआ है। अशोक अग्रवाल ने बताया कि बृहस्पतिवार को सुनवाई के दौरान पहले कोई और वकील सरकार की तरफ से खड़ा हुआ था, लेकिन कोर्ट ने जब योजना को अस्वीकृत करने के संकेत दिए तो दोपहर बाद राकेश मेहरा पेश हुए और उन्होंने कहा कि अस्पताल में सभी को इलाज मिलेगा।               
 दिल्ली के लोगों के कर के पैसे से अस्पताल को फंड मिलता है। ऐसे में अस्पताल की सुविधाओं का लाभ भी उन्हें ही मिलना चाहिए, इसलिए यह योजना बेहतर है। इससे लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी। डॉक्टर क्षमता से अधिक मरीज देख रहे थे। अब वह एक मरीज पर पांच से सात मिनट का समय दे सकते हैं। इससे उन्हें बेहतर इलाज मिलेगा।

- डॉ. सुनील कुमार, चिकित्सा निदेशक, जीटीबी अस्पताल

from Dainik Jagran

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