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बच्चों और बड़ों दोनों को होता है इस्केमिक हार्ट डिजीज का खतरा , जानें इसके खतरे और लक्षण

health Capsule

  • गलत खान-पान और जीवनशैली के कारण जम जाता है धमनियों में प्लाक।
  • नवजात शिशुओं में इस्केमिक हार्ट डिजीज के लक्षण साफ दिखते हैं।
  • कई बार जानलेवा भी हो सकता है एंजाइना का दर्द।

वर्ल्ड हार्ट डे यानी विश्व हृदय दिवस हर साल 29 सितंबर को मनाया जाता है। दिल हमारे शरीर का सबसे ज्यादा संवेदनशील और महत्वपूर्ण अंग है। इस्केमिक हार्ट डिजीज या इस्केमिक दिल की बीमारियां ऐसे रोग हैं जो रक्तप्रवाह में कमी के कारण होते हैं। अचानक हुई मौत में से ज्यादातर का कारण यही इस्केमिक हार्ट डिजीज होते हैं। इन्हें कोरोनरी धमनी रोग (CAD) या कोरोनरी हृदय रोग (CHD)भी कहा जाता है। ये एक ऐसी स्थिति है जिसमें हृदय को ऑक्सीजन युक्त रक्त की आपूर्ति करने वाली धमनियों में प्लाक बन जाता है। ये प्लाक वसा, कोलेस्ट्रॉल, कैल्शियम और रक्त में मौजूद अन्य पदार्थों की वजह से बनता है। आइये आपको बताते हैं इस्केमिक हार्ट डिजीज के बारे में जरूरी बातें।

सबसे ज्यादा मौतों का कारण है इस्केमिक हार्ट डिजीज

कोरोनरी आर्टरी डिजीज या कार्डियो वस्क्युलर बीमारी के ज्यादातर मामलों का मुख्य कारण 'अथीरोमा' कही जाने वाली वसा धमनियों के अंदर जम जाती है, जिन्हें प्लाक भी कहा जाता है। प्लाक धमनियों को संकुचित करके आक्सीजन युक्त रक्त के प्रवाह का हृदय की मांसपेशी की ओर जाना कम करता है जिसके कारण एंजाइना (सीने में दर्द) या एक दिल का दौरा पड़ सकता है। दुनिया भर में सीएडी एक बहुत ही आम हृदय रोग और मृत्यु का एक प्रमुख कारण है।

क्यों होता है इस्केमिक हार्ट डिजीज

जब प्लाक धमनियों में जमा होती रहती है, तो समय के साथ इसकी सतह बढ़ती जाती है और खून के बहाव में रूकावट होने लगती है। इसके कारण एंजाइना का दर्द होने लगता है। ऐसा अधिकतर तब होता है जब इस सतह पर खून का थक्का बन जाता है। ऐसा होने पर हृदय की मांसपेशी के एक हिस्से में अचानक खून की कमी हो जाती है और वह क्षतिग्रस्त हो जाता है। इस अवस्था को ही हार्ट अटैक कहते हैं। अगर ये क्षति सीमित हो तो हृदय अपनी पहली वाली अवस्था में लौट सकता है लेकिन यदि नुकसान अधिक हो तो मौत भी हो सकती है।

बच्चों में इस्केमिक हृदय रोगों के लक्षण

जन्मजात हृदय की समस्याओं वाले कई व्यक्तियों में बहुत ही कम या कोई लक्षण नहीं पाये जाते। लेकिन कुछ गंभीर मामलों में लक्षण दिखाई देते हैं, खासतौर पर नवजात शिशुओं में यह प्रत्यक्ष होते हैं। इन लक्षणों में सामान्यतः तेजी से सांस लेना, त्वचा, होंठ और उंगलियों के नाखूनों में नीलापन, थकान और खून का संचार कम होना शामिल हैं। दिल के दौरे के लक्षणों में व्यायाम के साथ थकान शामिल है। सांस रोकने में तकलीफ, रक्त जमना और फेफड़ों में द्रव जमा होना तथा पैरों, टखनों और टांगो में द्रव जमा होना। जब तक बच्चा गर्भाशय में रहता है या जन्म के तुरंत बाद तक गंभीर हृदय की खराबी के लक्षण साधारणतः पहचान में आ जाते हैं। लेकिन कुछ मामलों में यह तब तक पहचान में नहीं आते जब तक कि बच्चा बड़ा नहीं हो जाता।

वयस्कों में इस्केमिक हृदय रोगों के लक्षण

  • अचानक सीने में दर्द दिल का दौरा पड़ने का संकेत हो सकता है, लेकिन अन्य चेतावनी के संकेत भी काफी मामलों में प्रत्यक्ष होते हैं।
  • आपको एक या फिर दोनो हाथों, कमर, गर्दन, जबड़े या फिर पेट में दर्द और बेचैनी महसूस हो सकती है।
  • आपको सांस की तकलीफ, ठंडा पसीना आना, मतली या चक्कर जैसे लक्षण हो सकते हैं।
  • आपको व्यायाम या अन्य शारीरिक श्रम के दौरान सीने में दर्द हो सकता है जिसे एनजाइना कहते हैं। जो कि जीर्ण कोरोनरी धमनी की बीमारी (सी ए डी) के आम लक्षण हैं।
  • लगातार सांस टूटने की अत्यधिक तीव्र तकलीफ दिल के दौरे की चेतावनी है। लेकिन हो सकता है यह अन्य हृदय की समस्याओं का संकेत हों।

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