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ब्रेन ट्यूमर को हराकर सौंदर्य प्रतियोगिता जीती

health Capsuleबेंगलुरु। जीत का जज्बा हो, तो इंसान मौत को भी मात दे सकता है। इसे साबित कर दिखाया है बेंगलुरु की एक महिला ने जिसनें ब्रेन ट्यूमर से लड़ाई कर न सिर्फ उसे मात दी, बल्कि इसके बाद अपने पैरों में खड़े होकर उद्यमी बनने का सफर पूरा किया। साल 2013 में सोनिया सिंह की जिंदगी में अचानक तूफान आ गया। तीन महीने के बच्चे की मां सोनिया अचानक बेहोश हो जाती थी। उसके सामने अंधेरा छा जाता था।
सीटी स्कैन किय गया, तो पता चला कि उसे मेडुलरी सिस्टिक ट्यूमर है, जो ब्रेन के स्टेम में है। इसकी वजह से वह ठीक से चलने या ठीक से बात करने में असमर्थ हो गई थी। ट्यूमर को हटाने के लिए की गई सर्जरी के बाद वह करीब दो साल तक बिस्तर पर रहने को मजबूर हो गई थी। अब भी, सोनिया दर्द से पीड़ित है और बाइक चलाने, ऊंची हील के जूते पहनने जैसी कई सामान्य चीजों को करने से पहले उन्हें सावधानी बरतनी पड़ती है।
हालांकि, इस सब के बाद भी सोनिया को अपने पैरों पर खड़े होने की इच्छा थी, जिसे उन्होंने पूरा किया। उन्होंने बीटीएम से सेकंड स्टेज में एक यूनिसेक्स सैलून खोला और इसके बाद हाल ही में उन्हें मिस इंडिया कर्नाटक कन्जीनीऐलटी 2018 का खिताब जीता। ट्यूमर उस हिस्से पर था, जो रीढ़ की हड्डी और उसकी क्रियाओं को नियंत्रित करता है। मुझे लगता है कि उन्हें उसमें से एक हिस्से को भी हटाना पड़ा था। मुझे बैठने, खाने, यहां तक ​​कि टॉयलेट जाने तक के लिए अपने पति की मदद चाहिए होती थी।
सोनिया ने कहा कि नौ साल तक कई एयरलाइन कंपनियों में काम करने के बाद, घर पर बैठना और कोई भी काम नहीं कर पाने की मजबूरी ने मुझे अवसाद में डाल दिया था। मैं कोशिश करती था कि मैं जो कुछ भी सीमित तरीके से व्यस्त रहने के लिए कर सकती हूं, वह करूं। बेटे की देखभाल करने में मैं काफी व्यस्त रहने लगी। तभी मेरे दिमाग में विचार आया कि मुझे अपने पैरों पर फिर से खड़ा होना है। मुझे नौकरी करनी थी या अपना खुद का व्यवसाय शुरू करना था। सर्जरी के बाद सोनिया को हमेशा ही यह बात परेशान करती थी कि उसे क्या हुआ है और इसकी वजह से उससे क्या छिन गया है। अपनी सर्जरी के तीन साल बाद आखिरकार सोनिया फिर से अपने पैरों पर खड़ी होने के लिए तैयार थीं।
सबसे पहले, उसने नौकरी करने की कोशिश की। मगर, जब काम करने जाने और स्कूल से अपने बेटे को लेने के लिए वापस आने में काफी थकान महसूस होने लगी, तो उन्होंने अपना व्यवसाय शुरू करने का फैसला किया और सैलून खोला। एक दिन पुरानी तस्वीरों को देखते हुए महसूस हुआ कि अपने ग्रूमिंग और हॉस्पिटेलिटी के अनुभव का इस्तेमाल कहीं और करना चाहिए। इस तरह से सौंदर्य प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का रास्ता खुला। 
from Dainik Jagran
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