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स्टेम सेल की नई विधि से 25 हजार रुपये में घुटने का प्रत्यारोपण

health Capsuleमेरठ । बायोटेक्नोलॉजी की प्रोफेसर और दो शोध छात्रों ने स्टेम सेल को अलग करने का ऐसा सरल और सस्ता तरीका खोज लिया है, जो चिकित्सा जगत की सूरत बदल देगा। इस शोध टीम ने नई तकनीक के जरिये स्टेम सेल को अलग कर उससे लैब में हड्डी, मांस और चर्बी का निर्माण कर चकित कर दिया है।
यह खोज घुटने के प्रत्यारोपण की जरूरत ही खत्म कर देगा। अभी घुटने के ऑपरेशन में दो से तीन लाख का खर्च आता है। नई तकनीक यही काम महज 25 हजार रुपये में कर देगी। कोई ऑपरेशन नहीं। सिर्फ एक इंजेक्शन ही क्षतिग्रस्त कार्टिलेज को रिपेयर कर देगा। इस रिसर्च को पेटेंट के लिए भेजा गया है। मेरठ इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (एमआइईटी) की लैब में शोधार्थी छात्र दीपक और हर्षल।
ये हैं शोधार्थी
मेरठ इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (एमआइईटी) के बायोटेक्नोलॉजी विभाग की अध्यक्ष डॉ. एलिजा चक्रवर्ती के निर्देशन में दीपक कुमार और हर्षल कुमार ने मानव शरीर से स्टेम सेल को अलग करने की नई तकनीक खोजी है। डॉ. चक्रवर्ती की टीम ने एक विशेष साल्ट का प्रयोग कर एडिपोज स्टेम सेल को अलग किया है। यह सरल है और सस्ता भी।

एक साल्ट का कमाल 

शोधार्थियों ने सबसे पहले लैब में मानव चर्बी के टिश्यू से वाइल साल्ट के माध्यम से स्टेम सेल को अलग किया। वाइल साल्ट एक विशेष साल्ट है, जो बाजार में भी मिलता है। यह साल्ट हमारे लीवर में भी बनता है। जो भोजन को पचाने में काम आता है। शोधार्थियों ने अलग-अलग तापमान पर इस साल्ट की मदद से स्टेम सेल को अलग करने में कामयाबी हासिल की। फिर स्टेम सेल को 37 डिग्री तापमान पर अलग-अलग मीडियम के साथ कल्चर करके सेल तैयार किया। लैब में तैयार हुआ यह स्टेम सेल किसी भी सेल में पनप सकने की क्षमता रखता है।

अभी महंगा पड़ता है स्टेम सेल का इलाज

अभी स्टेम सेल को एंजाइम डायग्नोस्टिक तकनीकी से अलग किया जाता है। यह काफी महंगी और जटिल है। 100 मिलीग्राम एंजाइम 15 से 20 हजार रुपये में मिलता है। इस विधि से स्टेम सेल को बहुत मुश्किल से अलग किया जाता है। इसमें स्टेम सेल की मात्रा भी कम होती है। इस विधि से स्टेम सेल को अलग कर घुटने का इलाज किया जाए तो खर्च दो से तीन लाख रुपये आता है।

घुटने के ऑपरेशन की जरूरत ही नहीं पड़ेगी

शोधार्थियों ने महज दो हजार रुपये के वाइल साल्ट से काफी मात्रा में स्टेम सेल को अलग किया है। इस आसान और सस्ती तकनीक से 20 से 25 हजार रुपये में स्टेम सेल का इंजेक्शन घुटने में लगाया जा सकेगा। न कोई जटिल ऑपरेशन, न कोई रिस्क, न ही किसी साइड इफेक्ट का डर। आर्थराइटिस और पुराने घाव के लिए भी यह तकनीक वरदान साबित होगी।

क्या है स्टेम सेल

स्टेम सेल ऐसी कोशिका होती है, जिससे मानव शरीर के किसी भी अंग को विकसित किया जा सकता है। खराब कोशिकाओं की मरम्मत की जा सकती है। हृदय या किसी भी अंग की क्षतिग्रस्त कोशिकाओं की रिपेयरिंग हो सकती है। मानव भू्रण व शिशु के गर्भनाल के रक्त से भी स्टेम सेल निकालकर इसे माइनस 200 डिग्री

तापमान पर सुरक्षित रखा जाता है।

हम लोग सालभर से इस पर काम कर रहे थे। स्टेम सेल की मदद से किसी भी मीडियम का इस्तेमाल कर उस अंग विशेष का सेल तैयार किया जा सकता है। स्टेम सेल की खासियत है कि जिस अंग में कमी है, उसमें स्टेम सेल का इंजेक्शन देने पर वह उस अंग का हिस्सा बन जाता है। सरकार अगर चाहे तो इस नई तकनीक के जरिये आम लोगों को बहुत सस्ते में घुटने के इलाज की सुविधा उपलब्ध करा सकती है।

- डॉ. एलिजा चक्रवर्ती, विभागाध्यक्ष,

बायोटेक्नोलॉजी, एमआइईटी

from Dainik Jagran

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