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एक करोड़ में एक को होता है ऐसा कैंसर

health Capsuleभोपाल । दतिया के रहने वाले छह साल के मासूम आशीष (बदला नाम) को ऐसा कैंसर हुआ जो एक करोड़ में एक को होता है। उसके जबड़े में फाइब्रोसारकोमा कैंसर था। इसकी वजह से आशीष के गाल में एक तरफ बहुत सूजन हो गई थी। वह कुछ खा-पी नहीं पा रहा था। उसकी बीमारी तीसरी अवस्था में पहुंच गई थी। जवाहर लाल नेहरू कैंसर अस्पतालमें 28 मार्च को उसकी सर्जरी की गई है।
   डॉक्टरों के मुताबिक अब उसकी बीमारी ठीक होने की पूरी उम्मीद है। कैंसर सर्जन डॉ. रेणू सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश ही नहीं देश में इस तरह के कैंसर का कोई रिकार्ड नहीं मिला है। डॉ.सिंह ने बताया फाइब्रोसारकोमा बहुत ही दुलर्भ कैंसर है। खासतौर बच्चों में यह केस बहुत ही कम मिलते हैं। उसमें भी जबड़े में फाइब्रोसारकोमा की बीमारी तो एक करोड़ में एक को होती है। डॉ. सिंह ने बताया कि आशीष पिछले साल जुलाई में दिखाने के लिए अस्पताल आया था। सीटी स्कैन के बाद बायोप्सी की जांच की गई तो पता चला कि जबड़े का कैंसर है।इसे स्पिंडल सेल ट्यूमर भी कहा जाता है।
यह बीमारी बढ़ी हुई अवस्था में थी, इसलिए ऑपरेशन में मुश्किल हो रही थी। डॉक्टरों ने निर्णय लिया की कीमोथैरेपी दी जाए, जिससे बीमारी कम हो सके। बीमारी कम होने के बाद 28 मार्च को ऑपरेशन किया गया। खून की कमी होने पर ब्लड भी चढ़ाया गया।
कठिन थी सर्जरी
डॉ. रेणू सिंह ने बताया कि बच्चों की सर्जरी जोखिम भरी होती है। लिहाजा ऑपरेशन के पहले अच्छी तैयारी की गई। सर्जरी में दाहिनी तरफ का आधा जबड़ा निकाल दिया गया। इसके बाद खाली जगह को छाती की मांसपेशियों से भरा गया।
एक्सपर्ट व्यू
डॉ. अतुल समैया, कैंसर सर्जन यह सही है कि बच्चों में फाइब्रोसारकोमा कैंसर बहुत कम मिलता है। वह भी जबड़े में न के बराबर केस आते हैं। बड़ों में यह बीमारी मिलती है, लेकिन जबड़ में उनमें भी कम पाई जाती है।
from Dainik Jagran
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