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200 मरीजों ने बनाया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड

health Capsuleनई दिल्ली। आपका वजन 100 किलो हो या फिर उम्र 80 पार कर चुकी है। यदि इच्छा शक्ति है और आपका शरीर सर्जरी के लायक है तो नी एंड हिप ट्रांसप्लांट सर्जरी जरूर करवा लेनी चाहिए। इसमें देरी नहीं करनी चाहिए। नी ट्रांसप्लांट करवाने के 48 घंटे के अंदर मरीज चलने-फिरने लगता है और सही देखभाल की जाए तो फिर 20 से 25 साल तक यह ट्रांसप्लांट अापको बगैर दर्द जीवन जीने में मदद करते हैं। यमुना स्पोट् र्स कॉम्पलेक्स में नी एंड हिप ट्रांसप्लांट सर्जरी के लिए दूसरों को जागरूक करने के लिए सीनियर ऑर्थोपैडिक सर्जन डॉ. अनिल अरोड़ा के नेतृत्व में नी एंड हिप ट्रांसप्लांट सर्जरी करवा चुके 200 मरीज एकजुट हुए। ऐसा पहली बार हुआ, जो इतनी बड़ी संख्या में लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए मरीज इकट्ठा हुए। इसे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज कर लिया गया है। 
नी एंड हिप दोनों ट्रांसप्लांट करवाए, फिर भी हैं फिट
 दिलशाद गार्डन में रहने वाले 70 वर्षीय प्रेमचंद्र ने बताया कि उनके घुटने और कूल्हे खराब हो चुके थे। इसका कारण उनका स्पॉनडलाइटिस की बीमारी थी। डॉक्टरों के पास इलाज के लिए दो साल से चक्कर लगा रहे थे। सब ने यही कहा कि सर्जरी की बात भूलकर अपनी बची हुई जिंदगी जीएं। 20 साल पहले नी एंड हिप दोनों ट्रांसप्लांट हुए लेकिन आज भी वह अपना बिजनेस अकेले कर रहे हैं। 
ट्रांसप्लांट होने के बाद भी चढ़ जाती हूं तीसरी मंजिल 
मरीज सतीश ने बताया कि उनकी उम्र 76 है। वह दिल्ली सरकार में बतौर इंस्पेक्टर काम कर रही थीं। 2003 में रिटायरमेंट के बाद उन्हें चलने फिरने में दिक्कत होने लगी। एक वक्त ऐसा आया जब उनके पैर अचानक में जाम हो जाते थे। सहारा देने पर भी वह चल नहीं पाती थीं। नी ट्रांसप्लांट के बारे में उन्होंने कई तरह की बातें सुन रखीं थी। इसलिए डर भी लग रहा था। लेकिन उनकी इच्छा शक्ति थी कि उनकी सर्जरी कामयाब होगी। 2016 में उन्होंने ट्रांसप्लांट करवाया और आज वह बिल्कुल फिट हैं और तीसरी मंजिल तक चढ़ जाती हैं। सर्जरी के दौरान उन्हें थायरॉयड और बीपी जैसी समस्याएं भी थीं लेकिन वह भी सर्जरी सफल रही।
 
from dainikbhaska
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