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दिल्ली के अस्पतालों में दवाओं की भारी कमी

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नई दिल्ली । दिल्ली विधानसभा में मंगलवार को पेश की गई कैग रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि दिल्ली सरकार के अस्पतालों व औषधालयों में आवश्यक दवाओं की 43 प्रतिशत तक कमी है। इसके अलावा कर्मचारी भी 52 फीसदी कम हैं। 

उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने विधानसभा में सरकार के कामकाज की रिपोर्ट पेश की। इसमें आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी तथा होम्योपैथी से संबंधित 24 औषधालयों की जांच का हवाला दिया गया है। तीन मेडिकल कॉलेज, डॉ बीआर होम्योपैथिक अस्पताल तथा अनुसंधान केंद और चौधरी ब्रह्मप्रकाश आयुर्वेदिक चरक संस्थान में डॉक्टर, फार्मासिस्ट तथा नर्स की 37 से 52 फीसदी तक कमी निकली। 2012-17 के दौरान आयुष औषधालयों के लिए 163 डॉक्टर व 155 फार्मासिस्ट पद स्वीकृत थे। इसमें से 28 डॉक्टर व 61 फार्मासिस्ट पद 2017 तक खाली थे, जबकि 103 होम्योपैथिक औषधालयों में केवल 24 में ही रोगी देखभाल के लिए स्टॉफ उपलब्ध था। सामान्य तौर पर इन केंद्रों के लिए तीन कमरों इतनी जगह की जरूरत होती है। लेकिन, 16 केंद्र केवल दो व पांच केवल एक ही कमरे में चल रहे थे।

ये गड़बड़ियां भी मिलीं
 डॉ. बीआर होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज में निर्माण कार्य में देरी से 27 फीसदी आरक्षण नहीं मिला
 चौधरी ब्रहम प्रकाश संस्थान में जगह की कमी से योग व प्राकृतिक चिकित्सा नहीं 
 आयुर्वेदिक व यूनानी औषधालयों में केवल 40 प्रतिशत दवाएं
 2012-17 के बीच 43 प्रतिशत अति आवश्यक दवाएं नहीं,दवाओं की जांच के इंतजाम भी नहीं थे

32 रक्त संग्रह केंद्र के पास लाइसेंस ही नहीं

कैग रिपोर्ट में बताया गया है कि लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं वजह से रक्त कोष केंद्र अवैध हो गए हैं। 68 में से 32 रक्त कोष में यह कमी पाई गई है। इनके पास लाइसेंस नहीं मिला। स्वैच्छिक रक्त संग्रहण में भी कमी आई है। 2014-15 के दौरान 54.55 प्रतिशत संग्रह था, जो 2016-17 में गिरकर 45.20 प्रतिशत ही रह गया है। इन केंद्रों पर कार्य प्रणाली पर निरीक्षण व निगरानी अपर्याप्त थी।

ढाई साल में एक भी शौचालय नहीं बना

दिल्ली में स्वच्छ भारत मिशन के तहत ढाई साल में सरकारी एजेंसियों ने एक भी शौचालय नहीं बनाया। यह मिशन अक्तूबर 2014 में शुरू किया गया था। इस मद में सरकारी एजेंसियों को फंड से 40.13 करोड़ की धनराशि जारी की गई थी। इससे यह धनराशि बैंक में ही पड़ी रही। इस योजना की सही निगरानी नहीं होने से यह परेशानी सामने आई। दिल्ली सरकार ने इस योजना को महत्ता नहीं दी।


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