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डॉक्टर बोले 99% तक टल जाता है हार्ट अटैक का खतरा

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नई दिल्ली । अभिनेत्री श्रीदेवी की 54 साल में हुई असमय मौत ने सभी को चौंका दिया है। उनकी मौत से पूरा देश स्तब्ध है। मौत पैसा या पद नहीं देखती, बस आ जाती है। लेकिन हॉर्ट अटैक से होने वाली मौत से बचा जा सकता है।

श्रीदेवी के निधन के बाद एक कार्यक्रम में सवालों का जवाब देते हुए देश के जानेमाने हृदय विशेषज्ञ नरेश त्रेहान ने कहा कि रोजाना 20 हजार से ज्यादा लोगों की मौत अचानक आए हार्ट अटैक से हो जाती है। भारत में ऐसे केस अन्य देशों की तुलना में ज्यादा देखने को मिले हैं। उन्होंने कहा कि हॉर्ट अटैक का खतरा 99% तक टाला जा सकता है, अगर आप रेगुलर हेल्थ चेकअप कराते हैं।

उन्होंने कहा कि 30 की उम्र पार करने के बाद सभी को नियमित रूप से हेल्थ की जांच करानी चाहिए। हॉर्ट अटैक के लक्षण को ट्रेस करना बड़ी बात नहीं। रेगुलर हेल्थ चेकअप से आसानी से पता चल जाता है कि शरीर में कहां क्या खामी है और समय रहते इन खामियों को दूर हार्ट अटैक जैसे खतरे से बचा जा सकता है। 

पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में हृदयरोग की आशंका अधिक

शोध में पता चला है कि महिलाओं में मानसिक तनाव के कारण हृदयरोग की आशंका पुरुषों की तुलना में कई गुना अधिक होती है। जॉर्जिया स्थित इमोरी यूनीवर्सिटी में हुए शोध में हार्ट अटैक झेल चुकी महिला मरीजों के आंकड़ों पर अध्ययन किया गया। 

इस अध्ययन में कहा गया है कि मानसिक तनाव के कारण मायोकॉर्डियल इस्कीमिया की समस्या हो जाती है। इसके कारण हृदय की मांसपेशियों में रक्त का प्रवाह असंतुलित हो जाता है। यह शोध अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन में प्रकाशित हुआ है। 

इसमें कहा गया है कि हृदय की बीमारी से जूझ रही महिलाओं को उबरने के लिए पुरुषों की अपेक्षा गहन देखभाल की जरूरत होती है। मानसिक तनाव भी पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं के हृदय की सेहत को अधिक प्रभावित करता है। इससे पहले हुए शोध में यह तो साबित हुआ था कि मानसिक तनाव से महिलाओं को हृदय रोग का खतरा अधिक होता है, लेकिन किस हद तक यह स्पष्ट नहीं हुआ था। 

प्रमुख शोधकर्ता वोइला वकारिनो का कहना है कि मायोकॉर्डियल इस्कीमिया में हृदय की मांसपेशियों में रक्त का प्रवाह कम हो जाता है। यह हृदय की धमनियों के पूरी तरह अवरुद्ध होने के कारण हो सकता है। इस शोध के लिए हार्ट अटैक के कारण अस्पताल पहुंचने वाली 61 साल की उम्र की डेढ़ सौ महिलाओं और 156 पुरुषों के आंकड़ों का अध्ययन किया गया। 

डॉ. वकारिनो का कहना है कि महिलाएं इस्कीमिया के प्रति अधिक संवेदनशील इसलिए होती हैं क्योंकि उनकी छोटी रक्त धमनियों में प्रवाह बाधित हो जाता है। यह स्थिति अक्सर भावनात्मक तनावा के कारण उत्पन्न होती है। इस कारण महिलाओं में कोई लक्षण न होने के बावजूद इस्कीमिया की आशंका अधिक रहती है।

असंतुलित प्रवाह होता है दुश्मन

मायोकॉर्डियल इस्कीमिया के कारण हृदय की मांसपेशियों में रक्त प्रवाह असंतुलित हो जाता है। यह हृदय की धमनियों के पूरी तरह अवरुद्ध होने के कारण हो सकता है। 

दिल के लिए खतरनाक हैं ये लक्षण

माना जाता है कि हार्ट अटैक इंसान को कभी भी आ सकता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हार्ट अटैक आने के संकेत महीने भर पहले से ही मिलने शुरू हो जाते हैं। हार्ट अटैक के पहले कई रोगियों ने हाथ, जबड़े, दांत या सिर में दर्द की शिकायत की है। 

सीने में जलन या बदहजमी- अगर आपके सीने में लगातार जलन हो रही है या फिर आप बदजहमी की समस्या से जूझ रहे हैं तो आपको सावधान हो जाना चाहिए। ठीक ना होने वाली बदहजमी हार्ट अटैक का एक संकेत हैं।

सांस लेने में समस्या- सांस लेने में समस्या हो रही है या फिर पूरी तरह से सांस लेने के बाद भी आपको सांस की कमी महसूस हो रही है तो यह हार्ट अटैक का संकेत हो सकता है।

उल्टी- बार-बार उल्टी और पेट में दर्द भी हार्ट अटैक से पहले दिखने वाले लक्षणों में शामिल है।

कंधों में दर्द- हाथ के अलावा अगर लगातार आपके कंधों में दर्द हो रहा है या फिर अपर बैक में दर्द हो रहा है तो सावधान हो जाएं। हार्ट अटैक के पहले कई रोगियों में यह लक्षण दिखा है।

पसीना- शरीर से बहुत अधिक पसीना निकलना भी हार्ट अटैक का लक्षण है

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