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प्रोटीनयुक्त आहार से भूलने की बीमारी का खतरा कम

health Capsuleनई दिल्ली। मीट और फलियां जैसे प्रोटीन से भरपूर आहार अल्जाइमर से बचाव में कारगर हो सकता है। एक अध्ययन का दावा है कि ऐसे आहार के सेवन से भूलने की इस बीमारी के बढ़ते खतरे को कम किया जा सकता है। ऑस्ट्रेलिया की एडिथ कोवान यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने 541 लोगों के आहार और उनके मस्तिष्क में एमलाइड बीटा के स्तर को परखा। एमलाइड बीटा अल्जाइमर का संकेत माना जाता है।
 शोधकर्ताओं ने पाया कि प्रोटीन से भरपूर आहार का सेवन करने वाले प्रतिभागियों में एमलाइड बीटा का उच्च स्तर नहीं पाया गया। इससे अल्जाइमर के बढ़ते खतरे में कमी पाई गई। शोधकर्ता बिनोशा फर्नांडो ने कहा कि प्रोटीन के ज्यादा सेवन से एमलाइड बीटा को बढ़ने से रोका जा सकता है। 
इस भयानक बीमारी के प्रारंभिक कारणों का चला पता  
अल्जाइमर रोग की कार्यप्रणाली को समझने की दिशा में भारतीय वैज्ञानिकों ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। बेंगलुरू स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के वैज्ञानिकों ने यह पता लगाया है कि रोग के प्रारंभिक चरणों में स्मृति ह्रास किस प्रकार होता है। उन्होंने पता लगाया कि मस्तिष्क में फाइबरिलर एक्टिन या एफ-एक्टिन प्रोटीन के जल्दी विखंडित होने से स्नायु कोशिकाओं के बीच संचार संपर्क अस्तव्यस्त हो जाता है, जिसकी वजह से स्मृति ह्रास होने लगता है।
यह प्रोटीन स्नायु कोशिकाओं की सतह पर मशरूम जैसी आकृतियों (डेंड्राइटिक स्पाइंस) की समरूपता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। यह आकृतियां स्नायु कोशिकाओं के जंक्शन यानी जोड़ पर कोशिकाओं को एक-दूसरे के साथ जोड़ने और संकेतों के संप्रेषण में मदद करती हैं। स्नायु कोशिकाओं के जोड़ को सिनेप्सेस कहते हैं। जब डेंड्राइटिक स्पाइंस में कमी आती है या उनमें कोई और गड़बड़ी पैदा होती है तब स्नायु कोशिकाओं के बीच संचार बाधित हो जाता है।
 
from Dainik Jagran
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