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एम्स के सहयोग से आइटीओ पर खुलेगा कैंसर केयर सेंटर

health Capsuleनई दिल्ली। कैंसर की बढ़ती बीमारी और उसके रोकथाम के मकसद से आइटीओ पर एम्स के राष्ट्रीय कैंसर सेंटर (एनसीआइ) के सहयोग से कैंसर केयर सेंटर खुलेगा। इसके लिए एनसीआइ, युवा भारती ट्रस्ट व इंडियन सोसायटी ऑफ क्लीनिकल आंकोलॉजी (आइएससीओ) के बीच करार हुआ है। युवा भारती ट्रस्ट ने एम्स को आइटीओ पर स्थित चंद्रशेखर भवन में जगह उपलब्ध कराने पर सहमति दी है। इसलिए इस सेंटर का नाम भी पूर्व प्रधानमंत्री के नाम पर चंद्रशेखर सेंटर फॉर कैंसर केयर होगा। इस सेंटर में कैंसर की स्क्रीनिंग, सर्वाइकल कैंसर के टीकाकरण, टेली आंकोलॉजी व प्रशिक्षण की सुविधा होगी। इसलिए कैंसर की स्क्रीनिंग व डॉक्टर से सेकेंड ओपिनियन के लिए हर जरूरतमंद व्यक्ति को एम्स जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। बल्कि आइटीओ पर खुलने वाले सेंटर में भी एम्स के कैंसर विशेषज्ञ उपलब्ध होंगे। यहां पहुंचकर भी जरूरतमंद लोग कैंसर विशेषज्ञों से सलाह ले सकेंगे। इसके अलावा स्क्रीनिंग भी करा सकेंगे। एम्स के डॉक्टर कहते हैं कि संस्थान के कैंसर सेंटर में मरीजों की अधिक भीड़ होती है। काफी संख्या में मरीज सिर्फ सेकेंड ओपिनियन के लिए पहुंचते हैं। कई भीड़ देखकर घबरा जाते हैं।
खासतौर पर स्क्रीनिंग के लिए पहुंचने वाले लोगों के मन मस्तिष्क पर इसका प्रभाव अधिक होता है। लोग यह सोचकर घबरा उठते हैं कि कहीं स्क्रीनिंग में कैंसर की बीमारी का पता चला तो क्या होगा? जबकि स्क्रीनिंग के जरिये कैंसर की खतरनाक बीमारी से बचा जा सकता है। बीमारी होने पर शुरूआत में ही उसका पता लगाकर बेहतर इलाज संभव है। इसलिए आइटीओ पर सेंटर शुरू करने की पहल की गई। इसके लिए युवा भारती ट्रस्ट भी इच्छुक था। उनसे लंबे समय से बातचीत चल रही थी।
 ट्रस्ट लोगों की सेवा के लिए जगह उपलब्ध कराने को तैयार है। सेंटर के संचालन के लिए समझौते में शामिल तीनों संगठन मिलाकर एक समिति बनाएंगे। इसके अध्यक्ष एम्स कैंसर सेंटर व एनसीआइ के प्रमुख डॉ. जीके रथ होंगे। इस समिति की हर तीन महीने में एक बैठक जरूर होगी। एम्स कैंसर सेंटर के प्रिवेंटिव आंकोलॉजी के सहायक प्रोफेसर डॉ. अभिषेक शंकर ने कहा कि मार्च में ओरल कैंसर व सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग शुरू कर दी जाएगी। स्तन कैंसर की पहचान के लिए स्वत: जांच की विधि बताई जाएगी। यहां लोगों को सामान्य माहौल मिलेगा, इससे लोग सहज महसूस कर सकेंगे। टेली आंकोलॉजी सेवा का फायदा यह होगा कि दूर दराज के डॉक्टर जरूरत पड़ने पर कैंसर की बीमारी या किसी मरीज के बारे में टेलीकांफ्रेंस या वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये संपर्क कर सकते हैं।
from Dainik Jagran
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