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...ऐसे में बच्चे करते हैं सवाल

health Capsule

नई दिल्ली। पढ़ने-लिखने में होशियार लेकिन उसके अभिभावक इस बात से ज्यादा परेशान रहते हैं कि वो जरूरत से ज्यादा कार्टून देखती है। इसके साथ ही खाने के लिए वो जंक फूड ज्यादा पसंद करती है। अभिभावक कहते हैं कि वो उसकी जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हैं।लेकिन जिस तरह से वो मोटापे की शिकार हो रही है वो उनके लिए चिंता का विषय है। वो अपनी परेशानी के बारे में बताते हैं कि ज्यादा टोकाटाकी करने पर उनकी बेटी गुस्सा हो जाती है और असमान्य व्यवहार करती है। लेकिन अब उनकी समस्या कुछ हद तक दूर हो सकती है। सूचना प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी ने लोकसभा को बताया कि अब कार्टून चैनलों पर बर्गर, पिज्जा और कोल्ड ड्रिंक जैसे विज्ञापन नहीं दिखाए जाएंगे। ऐसे में सवाल है कि क्या कार्टून चैनल बच्चों में मोटापे के लिए जिम्मेदार हैं। क्या कार्टून चैनलों पर जंक फूड के विज्ञापन प्रसारित न होने से मोटापे की समस्या खत्म हो जाएगी। वैश्विक और घरेलू स्तर पर बच्चों में मोटापा कितनी गंभीर समस्या बनती जा रही है इसे समझने से पहले ये जानने की जरूरत है कि केंद्र सरकार इस संबंध में क्या सोचती है। 

बच्चों को अत्यधिक फैट वाले जंक फूड के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए नौ बड़ी कंपनियों ने खुद यह फैसला लिया है। लोकसभा में यह जानकारी सूचना व प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी ने दी। वहीं, सूचना व प्रसारण राज्यमंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने बताया कि फूड एंड बेवेरेज अलायंस ऑफ इंडिया जैसे संगठन ने स्वैच्छिक रूप से बच्चों से संबंधित उत्पादों का विज्ञापन नहीं दिखाने का फैसला लिया है। दोनों मंत्री सदन में सदस्यों के सवालों का जवाब दे रहे थे। उम्मीद की जा रही है कि इस कदम से बच्चों को जंक फूड के आकर्षण से बचाने में मदद मिलेगी।

लोकसभा में कुछ सदस्यों ने जंक फूड से बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर चिंता जताई थी। यह सवाल भी उठाया गया कि टेलीविजन पर जंक फूड एवं कोल्ड/साफ्ट डिंक के विज्ञापनों पर सरकार प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रही या नहीं। इसके जवाब में ईरानी ने कहा कि वर्तमान में हालांकि इस तरह का कोई प्रस्ताव नहीं है। लेकिन नौ बड़ी कंपनियों ने उच्च फैट, साल्ट या शुगर युक्त उत्पादों का विज्ञापन काटरून चैनलों पर नहीं दिखाने का फैसला लिया है।

मोटापे की गिरफ्त में बच्चे

बच्चों में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है। WHO के मुताबिक दुनियाभर में 42 मिलियन 5 साल के बच्चे मोटापे का शिकार हैं। बच्चों में मोटापे से उन्हें गंभीर रोग जैसे डायबिटीज और दिल संबंधी बीमारी होने का खतरा कई गुना ज्यादा बढ़ जाता है। दुनियाभर में हर साल 20 लाख मोटापे से ग्रस्त लोग अपनी जान खो बैठते हैं।

“पीडियाट्रिक ओबेसिटी” नामक एक जर्नल में प्रकाशित एक रिसर्च के अनुसार भारत में साल 2025 तक मोटापे से पीडि़त बच्चों की संख्या 1.7 करोड़ तक पहुंच जाएगी। भारत मोटे बच्चों के मामले में दुनिया के 184 देशों की सूची में दूसरे स्थान पर आ जाएगा। जो काफी चौंका देने वाला है।

डॉ.के के. अग्रवाल का कहना है कि बच्चों में मोटापा बढ़ना और इसका दुष्प्रभाव आज चिंता का विषय है। बच्चों में मोटापा बढ़ाने के लिए जंक फूड जिम्मेदार है। कई स्कूलों की कैंटीन में पिज्जा और कोल्ड ड्रिंक बेचे जा रहे हैं, बिना इस बात पर ध्यान दिए कि इससे कितने बच्चों की सेहत को नुकसान हो रहा है। आरामतलब जिन्दगी भी मोटापा बढ़ाने का एक कारण है।

154 निजी चैनलों ने किया विज्ञापन कोड का उल्लंघन

सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी ने बताया कि 2014 से अब तक करीब 54 निजी चैनलों ने कार्यक्रम एवं विज्ञापन कोड का उल्लंघन किया है। उन्होंने बताया कि 2014 और 2015 में 17-17 चैनलों ने उल्लंघन किया, जबकि 2016 में 16 चैनलों ने कोड का उल्लंघन किया। 2017 में इसमें गिरावट आई और केवल चार चैनलों ने उल्लंघन किया।स्मृति ईरानी ने संसद को बताया, नौ बड़ी कंपनियों ने खुद किया फैसला

अमेरिका और चीन के बाद मोटे लोगों की संख्या के मामले में भारत तीसरे स्थान पर है। किशोरों में 11 फीसदी और सभी वयस्कों में 20 फीसदी लोग मोटे हैं। वैश्विक कुपोषण के रूझानों की माप करने वाले एक ताजा अध्ययन में यह जानकारी सामने आई है। 

ऐसे विज्ञापनों पर रोक की सिफारिश

सूचना व प्रसारण मंत्री ने बताया कि भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने विशेषज्ञों का एक समूह बना रखा है। यही समूह उच्च फैट, शुगर और साल्ट फूड से संबंधित मुद्दों का समाधान करेगा। वैसे इस विशेषज्ञ समूह ने अपनी रिपोर्ट में बच्चों के लिए चलने वाले काटरून चैनलों या चिल्ड्रेन शो के दौरान उच्च फैट, शुगर और साल्ट युक्त खाद्य पदार्थो के विज्ञापनों पर रोक लगाने की सिफारिश की है।

from Dainik Jagran
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