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भारतीय महिलाओं के लिए काल बना 'कैंसर''

health Capsuleनई दिल्ली। रोग किसी भी रूप में हो या किसी भी तरह का हो किसी भी परिवार को मानसिक और आर्थिक तौर पर तोड़ देता है। खिलखिलाते हुए शख्स का चेहरा मुरझा जाता है। ऐसे में अगर डॉक्टर किसी शख्स को जब ये बताता है कि वो कैंसर से पीड़ित है तो मानो सब कुछ एक पल में बिखरने लगता है। भारत युवाओं का देश है जिसकी करीब आधी आबादी महिलाओं की है। लेकिन एक डरावना सच ये है कि महिलाएं बहुत तेजी से कैंसर की गिरफ्त में आ रही हैं। एक महिला के कैंसर में आने का अर्थ ये है कि सबसे ज्यादा उसका परिवार प्रभावित होने लगता है, अगर बड़े परिप्रेक्ष्य में देखें तो देश भी उस नुकसान का सामना करता है। चीन और अमेरिका के बाद भारत तीसरा बड़ा देश जहां महिलाओं पर कैंसर का खतरा सबसे ज्यादा है। एक अनुमान के मुताबिक भारत में कैंसर प्रभावित महिलाओं की संख्या करीब सात लाख है।भारतीय महिलाएं और कैंसर

भारतीय महिलाओं की मृत्यु दर में कैंसर एक प्रमुख कारण है। बताया जा रहा है कि जागरुकता की कमी और बहुत देर से पहचान की वजह से महिलाएं मौत के गाल में समा रही हैं। चीन और अमेरिका के बाद भारत में कैंसर पीड़ित महिलाओं की संख्या प्रतिवर्ष 4.5 से 5 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। कॉल फॉर एक्शन की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में कैंसर पीड़ित महिलाओं की संख्या .7 मिलियन है, लेकिन ये आंकड़ा 1 मिलियन से लेकर 1.4 मिलियन तक है ये ऐसे मामले जिसमें या तो रोग की पहचान नहीं हो पाती है या ये मामले जानकारी में नहीं आ पाते हैं। भारतीय महिलाओं में सर्विकल और ब्रेस्ट कैंसर के केस ज्यादा हैं और उनकी मौत के लिए किसी दूसरे कारणों से ज्यादा इनका असर होता है।

डराती है ये रिपोर्ट

फिक्की, E&Y के आंकड़ों के मुताबिक 2015 में महिलाओं में कैंसर के जितने मामले सामने आए उनमें 19 फीसद ब्रेस्ट, 14 फीसद सर्विक्स युटरी और ओवरी के 7 फीसद संबंधित थे। अगर भारतीय राज्यों की तस्वीर देखें तो केरला, तमिलनाडु और दिल्ली में कैंसर के ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं।रिपोर्ट के मुताबिक महिलाओं में कैंसर के मामले में जहां सामान्य महिलाओं में जानकारी की कमी है वहीं मेडिकल पेशे से जुड़े लोगों में जानकारी की कमी है। इसके अलावा देश भर में कैंसर जांच की सुविधा का भी अभाव है। डॉक्टरों का कहना है कि अगर सर्विकल और ब्रेस्ट कैंसर को समय रहते पहचान लिया जाए तो इस रोग पर लगाम लगाना आसान होता है। 

मोटापा बना खतरा

रिपोर्ट के मुताबिक हर रोज 2000 महिलाओं की जांच में कैंसर का पता चलता है जिनमें 1200 महिलाओं में कैंसर अंतिम अवस्था में होता है। अंतिम चरण में कैंसर की जानकारी सामने आने के बाद उनके मरने की संभावना 3 से 17 गुना बढ़ जाती है। देर से पहचान होने की वजह से इलाज का खर्च भी बढ़ जाता है। अनुमान के मुताबिक लेट स्टेज कैंसर में इलाज का खर्च सामान्य इलाज में होने वाले खर्च से 1.5 से 2 गुना बढ़ जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि मोटापे की वजह से कैंसर का खतरा ज्यादा होता है। अगर वैश्विक स्तर पर देखें तो भारत में औरतों में मोटापा वैश्विक स्तर पर 2014 में 2004 की तुलना में दो गुना बढ़ा है। महिलाओं में शराब की खपत 2014 में 2000 की तुलना में तीन गुना बढ़ा है। इसके साथ ही ज्यादा उम्र में बच्चों का जन्म और ब्रेस्ट फीडिंग भी कैंसर के प्रमुख कारणों में से एक है।

कैंसर से ऐसे करें बचाव

- अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति के साथ शारीरिक संबंध बना रहे हैं जो पैपिलॉमा वायरस से प्रभावित है तो आप भी इसकी चपेट में आ सकते हैं क्योंकि यह वायरस फैलने वाला होता है। इसलिए किसी भी व्यक्ति से शारीरिक संबंध बनाने से बचें।

- ज्यादा से ज्यादा पत्तेदार सब्जियाँ, चना और फल खाने की कोशिश करें। सब्जियों और फलों में फाइबर मौजूद होता है जो रोगों से लड़ने की क्षमता रखता है। यह कई प्रकार के कैंसर से लड़ने में मददगार होता है। फूलगोभी, पत्तागोभी, टमाटर, गाजर जैसे फल और सब्जियाँ जरूर खानी चाहिए।  

 -शक्कर का सेवन कम-से-कम करना चाहिए। एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि महिलाओं में कोलोरेक्टल कैंसर की सम्भावना शक्कर के सेवन से काफी बढ़ जाती है।

- खाने का तेल इस्तेमाल करने से पहले यह देख लें कि आप जो तेल खाने जा रहे हैं वह स्वास्थ्य के लिए कितना फायदेमंद है। ऑलिव ऑयल या फिर कोकोनट ऑयल का इस्तेमाल भोजन पकाने में करें।

 - गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल लम्बे समय तक न करें। गर्भनिरोधक के ज्यादा लम्बे समय तक प्रयोग करने से औरतों में स्तन कैंसर या लीवर कैंसर होने का खतरा रहता है। साथ ही यह हृदयघात की सम्भावना को भी बढ़ाता है। हॉरमोन से संबंधित थैरेपी का प्रयोग कभी न करें।

from Dainik Jagran

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