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आपके किचन में ही है टीबी का इलाज

health Capsuleनई दिल्ली । टीबी (तपेदिक) के मामलों में एंटीबायोटिक प्रतिरोधी क्षमता से मुकाबले में बड़ी सफलता मिली है। भारतीय मूल के एक शोधकर्ता की अगुआई वाले अध्ययन में पाया गया कि एक तरह के प्याज से इस स्थिति से निपटा जा सकता है। ब्रिटेन के यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के शोधकर्ता संजीव भक्त के नेतृत्व वाले अध्ययन में पाया गया कि पर्शिया शलाट में बैक्टीरिया रोधी गुण पाया जाता है। इससे एंटीबायोटिक उपचार के प्रभाव को बेहतर किया जा सकता है।पर्शिया शलाट प्याज की तरह का एक पौधा है। बैक्टीरिया संक्रमित रोगी को एंटीबायोटिक की सलाह दी जाती है। जबकि टीबी के मामलों में चार प्रकार की एंटीबायोटिक का कॉकटेल दिया जाता है। लेकिन बैक्टीरिया संक्रमण के मामलों में रोगाणुओं में एंटीबायोटिक को लेकर प्रतिरोधी क्षमता बढ़ती जा रही है। नतीजतन दवाएं नुकसानदायक बैक्टीरिया को खत्म करने में विफल रहती हैं।
IIT वैज्ञानिकों का कमाल, प्याज के छिलके बनाएंगे बिजली

आइआइटी खड़गपुर के वैज्ञानिकों ने प्याज के छिलके से एक ऐसा सस्ता उपकरण बनाया है जो शरीर की हलचल से स्वच्छ ऊर्जा उत्पन्न कर सकता है। इससे पेसमेकर, स्वास्थ्य पर नजर रखने वाली ‘स्मार्ट’ गोलियों और शरीर पर धारण करने योग्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को ऊर्जा मिल सकती है। रिसर्चरों का कहना है कि यह उपकरण प्याज के छिलके के पीजोइलेक्ट्रिक गुणों का प्रयोग करता है। यह जैविक दृष्टि से स्वयं क्षरित हो जाता है और पर्यावरण के लिए अनुकूल है।पीजोइलेक्ट्रिक पदार्थ में रोजमर्रा की यांत्रिक हलचल की ऊर्जा को बिजली में बदलने की क्षमता होती है।पीजोइलेक्ट्रिक पदार्थ में रोजमर्रा की यांत्रिक हलचल की ऊर्जा को बिजली में बदलने की क्षमता होती है। आइआइटी खड़गपुर के प्रोफेसर भानुभूषण खटुआ का कहना है कि इस नायाब और किफायती उपकरण से आम आदमी भी किसी भी परिस्थिति में बिजली उत्पन्न कर सकता है। तेजी से बढ़ रही आबादी, औद्योगिकीकरण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स और वाहनों के अंधाधुंध उपयोग से पर्यावरण पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। 

 from Dainik Jagran


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