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शिशु के शरीर में प्रत्यारोपित की जा सकेगी ‘रोबोट’

health Capsuleनई दिल्ली। अमेरिकी वैज्ञानिकों ने एक सूक्ष्म रोबोट विकसित करने में सफलता पाई है। इसे शिशु के शरीर में प्रत्यारोपित किया जा सकता है जो जन्म के समय की दुर्लभ विकृति ओइसोफैगल एट्रिसिया को ठीक कर सकता है। यह एक आनुवांशिक रोग है। इस विकृति के चलते खाने की नली प्रभावित हो सकती है। अमेरिका के बोस्टन अस्पताल के शोधकर्ताओं ने यह प्रोटोटाइप रोबोटिक इंप्लांट विकसित किया है। यह शिशुओं में टिश्यू वृद्धि को प्रेरित कर सकता है। यह रोबोट एक छोटा उपकरण है जिसे भोजन की नली में दो छल्लों की मदद से जोड़ा जाता है। इसके बाद इसमें लगा मोटर सेल्स को प्रेरित करने का काम करता है। दो सेंसर के उपयोग से यह रोबोट टिश्यू वृद्धि पर नजर रख सकता है।
छोटे बच्चों को धूल से बचाने का काम करेगा खास तरह का रोबोट बेबी
वैज्ञानिकों ने एक ऐसा रेंगने वाला रोबोट विकसित करने में सफलता हासिल की है, जो यह बताएगा कि बच्चों का फर्श पर रेंगना उनके लिए कितना हानिकारक या सही है। दरअसल, शिशु जन्म के लगभग एक साल तक जमीन पर रेंगते हैं। ऐसे में फर्श पर मौजूद बहुत से धूल के कण और कीटाणु उन्हें हानि पहुंचाते हैं। शिशुओं को इनसे बचाने के उद्देश्य से वैज्ञानिकों ने यह रोबोट बेबी विकसित किया है। 
श्वास के जरिए दूषित कण शरीर के अंदर लेते हैं शिशु 
शोधकर्ताओं ने पाया कि जमीन पर रेंगने के दौरान शिशु की कई बार घिसटते हुए आगे बढ़ते हैं। इस दौरान फर्श खासकर कारपेट पर धूल, बैक्टीरिया, पराग, फंगल आदि अधिक स्तर पर मौजूद होते हैं। इन्हें शिशु श्वास में शरीर के भीतर लेते हैं, इसके अलावा उनके शरीर के अंग भी इन दूषित चीजों के संपर्क में आते हैं। शिशुओं इनसे को होने वाले बीमारियों से बचाने के लिए अमेरिका स्थित पड्र्यू यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने इस रोबोट बेबी को ईजाद किया है। यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर ब्रैंडन बोर के मुताबिक, ऐसे कई अध्ययन किए जा चुके हैं, जिनसे पता चलता है कि फर्श और कारपेट पर मौजूद धूल के कण अस्थमा और एलर्जी फैलाने का काम करते हैं। धूल के ज्यादातर कण वयस्कों के जूतों से अंदर आते हैं। 

from Dainik Jagran

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