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अमीर-गरीब के भेदभाव बिना इलाज करें डॉक्टर: राष्ट्रपति

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नई दिल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने देश में डाक्टरों की कमी पर चिंता जताई है। एम्स के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने पर्याप्त संख्या में डाक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए तत्काल जरूरी कदम उठाने पर बल दिया। इसके साथ ही उन्होंने डाक्टरों से भी इलाज के दौरान अमीर और गरीब के बीच फर्क नहीं करने की अपील की।

राष्ट्रपति ने कहा कि इस समय देश में निजी और सरकारी दोनों मेडिकल कालेजों से हर साल 67 हजार एमबीबीएस और 31 हजार पोस्ट ग्रैजुएट डाक्टर पास हो कर आ रहे हैं। लेकिन 130 करोड़ की जनसंख्या वाले देश में इलाज के लिए डाक्टरों की यह संख्या काफी कम है। उन्होंने कहा कि कुछ निहित स्वार्थ के कारण मेडिकल कालेजों में सीटें नहीं बढ़ने दी जाती है। सरकार की मेडिकल कालेजों में सीटों को बढ़ाने की राह की बाधाओं को तत्काल दूर करने के लिए कदम उठाना होगा। 

राष्ट्रपति के अनुसार देश में मेडिकल सीटों की कम संख्या की वजह से बहुत सारे बच्चे दूसरे देशों में जाकर पढ़ाई के लिए मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश में जो भी चिकित्सा के क्षेत्र में आकर आम लोगों की सेवा करना चाहता है, उन्हें इसका अवसर मिलना ही चाहिए। राष्ट्रपति ने कहा कि देश में थोड़े से डाक्टरों पर पूरी आबादी के इलाज की बड़ी जिम्मेदारी है। इन डाक्टरों को अब मदद की जरूरत है। इसके सहयोगियों की संख्या बढ़ाकर, इनका बोझ कम कर इनकी मदद की जा सकती है।

एम्स के डाक्टरों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने उन्हें इलाज के दौरान गरीब और अमीर के बीच फर्क नहीं करने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि बीमारी गरीबी और अमीरी देखकर नहीं आती है, लेकिन इससे सबसे अधिक प्रभावित गरीब आदमी होता है। डाक्टर को हर जरूरतमंद का इलाज समान भाव से करना चाहिए ताकि आम आदमी का उनपर भरोसा बरकरार रख जा सके। 

राष्ट्रपति ने देश में सभी बच्चों को पूर्ण टीकाकरण नहीं होने पर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि भारतीय कंपनियां पूरी दुनिया में टीके की सप्लाई करती है। लेकिन हम अपने देश में ही सभी बच्चों को इसे उपलब्ध कराने में असमर्थ रहे हैं, खासकर दूर-दराज के दुर्गम इलाकों में यह नहीं पहुंच पा रहा है।

from Dainik Jagran

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