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नहीं मिल रही सांस लेने लायक साफ हवा

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नई दिल्ली । देश में प्रदूषण का खतरा किसी बड़े शहर या औद्योगिक क्षेत्रों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसकी चपेट में लगभग हर नागरिक आ चुका है। एक अध्ययन में दावा किया गया है कि देश की 99.9 फीसदी आबादी को सांस लेने लायक साफ हवा मयस्सर नहीं है।

आईआईटी मुंबई, हेल्थ इफेक्ट इंस्टीट्यूट बोस्टन, वांग शूजियाओ विश्वविद्यालय बीजिंग और कोलंबिया विश्वविद्यालय कनाडा के शोधकर्ताओं द्वारा तैयार इस रिपोर्ट को गुरुवार को दिल्ली में जारी किया गया। रिपोर्ट में बताया गया कि देश की करीब-करीब पूरी आबादी को  विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के पीएम 2.5 मानकों से ज्यादा का प्रदूषण झेलना पड़ता है। प्रदूषण का औसत जोखिम 74 माइक्रॉन प्रति क्यूबिक मीटर तक पहुंच गया है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार हवा में पीएम 2.5 का औसत 10 माइक्रॉन प्रति क्यूबिक मीटर से कम होना चाहिए। लेकिन देश की 99.9 फीसदी आबादी ऐसे क्षेत्रों में रह रही है, जहां यह स्तर पार हो चुका है। साथ ही 90 फीसदी क्षेत्र डब्ल्यूएचओ के अंतरिम लक्ष्य जिसमें यह स्तर 35 माइक्रॉन प्रति क्यूबिक मीटर रखा है, उसे भी पार कर चुके हैं। 

ढाई दशक में बढ़ गया खतरा
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 1990 में वायु प्रदूषण का जोखिम 60 माइक्रॉन प्रति क्यूबिक मीटर था, जो वर्ष 2015 में बढ़कर 74 माइक्रॉन प्रति क्यूबिक मीटर तक पहुंच गया है। यह डब्ल्यूएचओ के अंतरिम लक्ष्य से दोगुना से भी ज्यादा है। 

दिल्ली में बदतर स्थिति
राजधानी दिल्ली में पिछले दिनों पीएम 2.5 की हवा में मात्रा बेहद खतरनाक स्तर तक पहुंच गई थी। पिछले साल दीपावली के आसपास इसका स्तर 350 यूनिट से भी ऊपर पहुंच गया था। आनंद विहार, कश्मीरी गेट और नॉर्थ कैम्पस के आसपास प्रदूषण का स्तर सबसे ज्यादा रहा था।


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