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तंबाकू उत्पादों पर 85 फीसद सचित्र चेतावनी रद करने के आदेश पर रोक

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नई दिल्ली। तंबाकू उत्पादों के पैकेट पर फिलहाल 85 फीसद सचित्र चेतावनी छपेगी। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तंबाकू उत्पादों पर 85 फीसद सचित्र चेतावनी छापने के आदेश को रद करने के कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि व्यवसाय से ज्यादा महत्वपूर्ण सेहत है।

कर्नाटक हाईकोर्ट ने तंबाकू उत्पादों के पैकटों पर 85 फीसद सचित्र चेतावनी छापने के केन्द्र सरकार के आदेश को गत 15 दिसंबर को रद कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि इस आदेश को रद करने से सचित्र चेतावनी के बारे में सरकार का पुराना आदेश स्वत: लागू हो जाएगा जिसमें 40 फीसद सचित्र चेतावनी छापने की बात कही गई है। हाईकोर्ट के इस आदेश को गैर सरकार संगठन हेल्थ फार मिलियंस और केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने केन्द्र और संगठन की याचिकाओं पर नोटिस भी जारी किया है। कोर्ट इस मामले में 12 मार्च को फिर सुनवाई करेगा। इस बीच हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी गई है। इससे पहले सरकार की ओर से पेश अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने हाईकोर्ट के आदेश का विरोध करते हुए कहा कि तंबाकू उत्पादों पर सचित्र चेतावनी छापना लोगों की सेहत से जुड़ा मुद्दा है। भारत में लोग अमेरिका की तरह पढ़े लिखे नहीं है यहां लोगों को तंबाकू से होने वाले नुकसान के प्रति सचेत करना जरूरी है। तंबाकू कैंसर आदि कितनी ही बीमारियों की जड़ है। सरकार ने सोच समझकर विशेषज्ञों से मशविरे के बाद तंबाकू उत्पादों के पैकटों पर 85 फीसद सचित्र चेतावनी छापने का आदेश जारी दिया था। हाईकोर्ट ने इन सब पहलुओं पर ध्यान दिये बगैर उसे रद कर दिया।

हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगनी चाहिए। जबकि दूसरी ओर तंबाकू उत्पादकों की ओर से पेश वकीलों ने व्यापार के अधिकार की दुहाई देते हुए हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगाने का विरोध किया। कपिल सिब्बल ने कहा कि नियम के मुताबिक सरकार के सचित्र चेतावनी का आदेश हर दो साल पर रिव्यू होना है। दो साल की अवधि 31 मार्च को खत्म हो रही है। ऐसे में कोर्ट को फिलहाल कोई रोक आदेश नहीं देना चाहिए। उन्होंने ये भी कहा कि संसदीय समिति की रिपोर्ट आयी है उसमें 40 फीसद की जगह 50 फीसद सचित्र चेतावनी छापने की सिफारिश की गई है। उसे ही लागू कर दिया जाए वे उस पर राजी हैं। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद सेहत को प्राथमिकता देते हुए हाईकोर्ट के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी।

from Dainik Jagran

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