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खत्म नहीं होगा एक्जिट एक्जाम, कुछ बदलावों के लिए सरकार तैयार

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नई दिल्ली। देश में चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सरकार एजिक्ट एक्जाम में ढील देने के मूड में नहीं है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग विधेयक में एक्जिट एक्जाम का प्रावधान है, जिसका मेडिकल के छात्र विरोध कर रहे हैं। वैसे सरकार छात्रों की समस्या को दूर करने के लिए मेडिकल कालेज के फाइनल एक्जाम को एक्जिट एक्जाम के रूप में बदलने पर विचार कर सकती है। लोकसभा में पेश विधेयक को फिलहाल स्थायी समिति के पास भेज दिया गया है।

स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि फिलहाल पूरे देश में मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता को एक समान करने की कोई व्यवस्था नहीं है। अभी मेडिकल कालेज खुद ही छात्रों को पढ़ाते हैं और उन्हें परीक्षा पास करने का सर्टिफिकेट भी देते हैं। अलग-अलग कालेजों में पढ़ाई का अलग-अलग स्तर होने के कारण पास होने वाले छात्रों की गुणवत्ता को एक समान बनाना संभव नहीं है। एमसीआइ भी मेडिकल कालेजों में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के बजाय शिक्षकों, अस्पताल, मरीज, लाइब्रेरी, लेबोरेटरी जैसी चीजें देखकर मान्यता देता रहा है। लेकिन पूरे देश में सभी छात्रों के एक ही एक्जिट एक्जाम होने से उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सकेगी।

छात्रों का कहना है कि पांच साल तक मेडिकल कालेज की परीक्षा पास करने के बाद उनसे अलग से परीक्षा नहीं ली जानी चाहिए। एक्जिट एक्जाम के खिलाफ छात्रों के बीच आक्रोश के बारे में पूछे जाने पर वरिष्ठ अधिकारी ने माना कि अलग से एक्जिट एक्जाम होने के उनकी परेशानी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि छात्रों की परेशानी दूर करने के लिए सरकार इसमें कुछ संशोधन के लिए तैयार है। इसके तहत मेडिकल कालेज की पांचवें साल की अंतिम परीक्षा को एक्जिट एक्जाम से जोड़ा जा सकता है। इससे छात्रों को अलग से कोई परीक्षा भी नहीं देनी होगी और देश में एक समान गुणवत्ता भी सुनिश्चित भी की जा सकेगी।

वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार एनएमसी का विरोध मुख्य तौर पर निजी मेडिकल कालेजों के मालिक और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) कर रहा है। आशंका यह है कि छात्रों को इस विधेयक के खिलाफ भड़काने के पीछे इसी का हाथ है ताकि एमसीआइ की जगह एनएमसी को लाने से रोका जा सके। लेकिन सरकार ने छात्रों की उचित मांगों को मानने का संकेत देकर देश में मेडिकल शिक्षा में सुधारों के प्रति प्रतिबद्धता जता दी है। वैसे वरिष्ठ अधिकारी ने यह भी साफ कर दिया कि स्थायी समिति की सिफारिशों पर खुले मन विचार करने और उनके अनुरूप में विधेयक में जरूरी बदलाव करने के लिए भी तैयार हैं।

from Dainik Jagran

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