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अापके स्वास्थ्य के प्रति सरकार गंभीर

health Capsuleनई दिल्ली। स्वास्थ्य क्षेत्र जर्जर है। निजी क्षेत्र में जो सुविधाएं हैं, वे सिर्फ पैसे वालों के काम आती है। ऐसे में वंचित तबका स्वास्थ्य सेवाओं से महरूम रह जाता है। बीता साल स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए काफी हंगामेदार रहा। निजी अस्पतालों में पारदर्शिता लाने के लिए सरकार ने कई पहल की है। आने वाले दिनों में नीतियों और योजनाओं के स्तर पर उठाए गए कदम सेहत को सुधारने में मदद करेंगे।
खुलेंगे जेनरिक दवा केंद्र
 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय देशवासियों के लिए जेनरिक दवाओं (जन औषधि) की उपलब्धता और भी आसान करने जा रहा है। इसके तहत देश भर के सभी पेट्रोल पंप व रेलवे स्टेशनों पर प्रधानमंत्री जन औषधि परियोजना के तहत जेनरिक मेडिसिन स्टोर खोले जाने का निर्णय लिया गया है। जनवरी 2018 से सरकार इसकी शुरुआत कर देगी। मार्च 2018 तक 1,500 स्टोर खोलने का लक्ष्य है। अभी तक देश में कुल 3031 जन औषधि स्टोर खोले जा चुके हैं। ऐसा होगा तो देश भर में जन औषधि स्टोर की संख्या 70 हजार के करीब हो जाएगी। देश में करीब 8500 रेलवे स्टेशन व 57 हजार पेट्रोल पंप हैं।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय देशवासियों के लिए जेनरिक दवाओं (जन औषधि) की उपलब्धता और भी आसान करने जा रहा है। इसके तहत देश भर के सभी पेट्रोल पंप व रेलवे स्टेशनों पर प्रधानमंत्री जन औषधि परियोजना के तहत जेनरिक मेडिसिन स्टोर खोले जाने का निर्णय लिया गया है। जनवरी 2018 से सरकार इसकी शुरुआत कर देगी। मार्च 2018 तक 1,500 स्टोर खोलने का लक्ष्य है। अभी तक देश में कुल 3031 जन औषधि स्टोर खोले जा चुके हैं। ऐसा होगा तो देश भर में जन औषधि स्टोर की संख्या 70 हजार के करीब हो जाएगी। देश में करीब 8500 रेलवे स्टेशन व 57 हजार पेट्रोल पंप हैं।


राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना

एक अप्रैल, 2008 को यह महत्वाकांक्षी योजना लांच हुई। इसका मकसद गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले (बीपीएल श्रेणी) परिवारों को स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान करना है। इसे अब तक 25 राज्यों में लागू किया जा चुका है। पहले यह श्रम और रोजगार मंत्रालय के अधीन था। लेकिन 2015 में इसे स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन रखा गया है। इस साल बजट में इसके लिए अधिक धन आवंटित हो सकता है।

बढ़ेंगी सुविधाएं

- देश के मौजूदा 70 मेडिकल कॉलेजों, दो नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट, 20 स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट और 50 अन्य कैंसर केयर सेंटरों में इस साल सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक भी खोलने का लक्ष्य है। इससे मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो पाएंगी। साथ ही बड़ी बीमारियों का इलाज भी जरूरतमंदों तक पहुंच सकेगा।

- 11 नए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भी खोलने की योजना पर काम हो रहा है। इसके लिए यह साल काफी अहम रहेगा।

टीकाकरण का बढ़ेगा दायरा

पिछले साल अक्टूबर में इंटेंसिफाइड मिशन इंद्रधनुष (आइएमआइ) अभियान के जरिये दिसंबर 2018 तक देश में टीकाकरण का दायरा 90 फीसद करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही 2020 तक टीकाकरण का दायरा न्यूनतम 90 फीसद तक पहुंचाना है।

बजट बढ़ने की संभावना

2018 में पेश होने वाले मोदी सरकार के चौथे बजट में महिला एवं बाल विकास के लिए आवंटित राशि में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। यह बढ़ोतरी 2017-18 बजट में आवंटित फंड से 10-20 फीसद तक अधिक रह सकती है। 2017 में बजट 48,853 करोड़ रुपये था। 2016 के मुकाबले 2017 में 23 फीसद की बढ़ोतरी हुई थी। बढ़ा स्वास्थ्य बजट देश से स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर और उन्हें हर तबके तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

मलेरिया मुक्त भारत 

सरकार ने जुलाई 2017 में देश से मलेरिया के खात्मे के लिए नेशनल स्ट्रेटजिक प्लान फॉर मलेरिया एलिमिनेशन 2017-22 लांच किया है। सरकार के मुताबिक पूर्वोत्तर भारत में लक्ष्य हासिल करने के बाद अब महाराष्ट्र, ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में प्रयास किए जाएंगे। वर्ष 2016 में सरकार ने नेशनल फ्रेमवर्क फॉर मलेरिया एलिमिनेशन 2016-2030 जारी किया।

डॉक्टरों की कमी होगी दूर

- देश में डॉक्टरों की कमी दूर करने और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए इस साल 58 नए मेडिकल कॉलेज खोले जाएंगे। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा इस पर हामी भर चुके हैं।

- केंद्र सरकार ने पिछले साल देश में डॉक्टरों की कमी दूर करने के मकसद से केंद्र सरकार के अतंर्गत आने वाले सभी सरकारी डॉक्टरों (राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा के अलावा) की सेवानिवृत्ति की आयु 62 से बढ़ाकर 65 कर दी है। इससे मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में आसानी होगी।

- सरकार के मुताबिक देश में 14 से 16 लाख डॉक्टरों की जरूरत है। अभी महज आठ लाख डॉक्टर ही हैं। छह लाख से अधिक डॉक्टरों की कमी है। लेकिन दावा किया जा रहा है कि 2022 तक इस समस्या को दूर कर लिया जाएगा। 

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