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जीवनशैली में बड़ा बदलाव बन रहा मानसिक रोगों का कारण

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नई दिल्ली। देश में मानसिक रोगियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, लेकिन उस अनुपात में मानसिक चिकित्सक नहीं हैं। आज देश में करीब 14 फीसद लोग मानसिक रोगों से ग्रस्त हैं, जबकि चिकित्सकों की संख्या करीब छह हजार है। ऐसे में मानसिक रोगों से निपटना एक बड़ी चुनौती है। कृष्णानगर में सुधार समिति और मोंडा मेडिकल सेंटर की तरफ से आयोजित 'मानसिक रोग क्यों और कैसे' विषय पर आयोजित संगोष्ठी में ये बातें सामने आई।

संगोष्ठी में मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिनव मोंगा ने कहा कि जीवनशैली और कार्यशैली में बड़े पैमाने पर आए बदलाव के कारण मानसिक रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। लोग अवसाद से ग्रस्त हो रहे हैं। पारिवारिक कलह अधिक है और बच्चों से शत-प्रतिशत परिणाम की उम्मीद रखी जाती है। ये तमाम पहलू मानसिक तनाव बढ़ा रहे हैं, जो धीरे-धीरे अवसाद की तरफ ले जाते हैं। मनोचिकित्सक से परामर्श लेकर तनाव दूर किया जा सकता है।

मनोचिकित्सक डॉ. अनु गहलोत ने बताया कि आज छोटी उम्र में ही बच्चे गुस्सैल और चिड़चिड़े हो रहे हैं। समाज और परिवार का माहौल इसका कारण है। परिवार में माता-पिता के झगड़े व शराब पीकर उत्पात मचाने जैसे माहौल से बच्चों के मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव पड़ता है। अभिभावकों को जब तक इसके असर का पता चलता है, तब तक काफी देर हो चुकी होती है। ऐसे लोगों की शुरुआत में ही काउंस¨लग करानी चाहिए।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ एवं निगम की स्वास्थ्य समिति के पूर्व चेयरमैन डॉ. वीके मोंगा ने कहा कि 40 वर्षो में लोगों के आचरण, व्यवहार आदि में काफी परिवर्तन आए हैं। आज लोगों के पास परिवार के सदस्यों से बात करने और उनकी समस्याओं पर चर्चा के लिए समय नहीं है। ऐसी स्थिति में तनाव बढ़ रहा है।

संगोष्ठी में स्वास्थ्य विशेषज्ञों के साथ महापौर नीमा भगत, पार्षद दीपक मल्होत्रा, संदीप कपूर, कंचन महेश्वरी, राजेश साहनी, रनवीर कुमार हैप्पी, कमल बुद्धिराजा, बॉबी भाटिया, कृष्णानगर सुधार समिति के अध्यक्ष राजीव शर्मा, लवली साहनी आदि मौजूद रहे।

from Dainik Jagran

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