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छह नए एम्स में काम करेंगे सेवानिवृत्त चिकित्सक

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नई दिल्ली। उपयुक्त डॉक्टरों की कमी के चलते छह नए अखिल भारतीय चिकित्सा विज्ञान संस्थान (एम्स) को पूरी तरह से संचालित करने में असमर्थ स्वास्थ्य मंत्रालय ने अनूठा फैसला लिया है। वह अब कांट्रैक्ट पर देश के मुख्य चिकित्सा संस्थानों के सेवानिवृत्त चिकित्सकों को नियुक्त करेंगे।

विभिन्न चिकित्सा विधाओं में दो दौर की रिक्तियां निकालने के बावजूद अधिकांश जगहें खाली रहने पर केंद्र सरकार ने अब सेवानिवृत्त चिकित्सकों को विभिन्न फैकल्टी में प्रोफेसर, एडीशनल और एसोसिएट प्रोफेसर बनाने का फैसला किया है। ऋषिकेश, जोधपुर, भोपाल, रायपुर, पटना और भुवनेश्वर के छह नए अखिल भारतीय चिकित्सा विज्ञान संस्थान (एम्स) में डॉक्टरों और फैकल्टी की कमी से अभी भी कामकाज सुचारु रूप से शुरू नहीं हुआ है। नए आदेश के मुताबिक राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों और सरकारी मेडिकल कालेजों में काम कर चुके 70 साल तक के सेवानिवृत्त चिकित्सकों को प्रोफेसर, एडीशनल प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसरों के पदों पर कांट्रैक्ट पर रखा जाए।

स्वास्थ्य मंत्रालय के एक प्रमुख अफसर ने बताया कि सभी छह नए एम्स में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के चलते स्पेशियालिटी और सुपर-स्पेशियालिटी विभागों में ऑउट पेशेंट और इन-पेशेंट की सुविधा नहीं शुरू की जा सकी है। उन्होंने बताया कि दो बार विज्ञापन दिए गए। जोधपुर, भोपाल, पटना, रायपुर, भुवनेश्वर और ऋषिकेश के एम्स के लिए 13,00 पदों की रिक्तियां निकाली गई थीं। लेकिन तब केवल 200 रिक्त पद ही भरे जा सके थे। अधिकांश लोग इन पदों के लिए उपयुक्त ही नहीं थे।

यह सेवानिवृत्त फैकल्टी संस्थान के निदेशक को रिपोर्ट करेगी। नियमित फैकल्टी की तरह ही सेवानिवृत्त फैकल्टी भी राष्ट्रीय सेमिनारों या सम्मेलनों में शामिल हो सकेगी। अगर उन्हें आधिकारिक असाइंटमेंट पर शहर के बाहर जाना पड़े तो उनके टूर के लिए उन्हें टीए/डीए भी मिलेगा। उन्हें यह भत्ते उनके सेवानिवृत्त होने से पहले के उनके वेतन के अनुरूप होंगे। नियम और शर्तो में कहा गया है कि सेवानिवृत्त फैकल्टी किसी भी तरह की निजी प्रैक्टिस नहीं कर सकेगी और ना ही लैब का संचालन और चिकित्सकीय परामर्श दे सकेगी।

from Dainik Jagran

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