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मैक्स अस्पताल मामले में पलटी सरकार, लाइसेंस बहाल

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नई दिल्ली। शालीमारबाग स्थित मैक्स अस्पताल का लाइसेंस रद करने के बाद फिर से दिल्ली सरकार ने बहाल कर दिया है। सरकार के लाइसेंस रद करने के आदेश पर दिल्ली सरकार के वित्तीय आयुक्त (अपीलीय अथॉरिटी) ने अस्पताल का लाइसेंस बहाल करने के आदेश जारी किए। लाइसेंस बहाल होने से दिल्ली सरकार की खूब किरकिरी हुई है। कहा जा रहा है कि जब रद करने के बाद लाइसेंस बहाल ही करना था तो सरकार को ड्रामा करने की क्या जरूरत थी? भाजपा ने इसके पीछे सरकार और अस्पताल के बीच बड़ी डील होना बताया है। वहीं आप से बर्खास्त मंत्री कपिल मिश्रा ने इसे केजरीवाल की सोची समझी साजिश बताया है। वहीं दिल्ली सरकार ने इस मामले को उपराज्यपाल के ऊपर डालने का प्रयास किया। इसे लेकर आम आदमी पार्टी ने दो बार प्रेस वार्ता बुलाई और सफाई देती रही। उधर, उपराज्यपाल अनिल बैजल की ओर से पहले ही स्पष्ट कर दिया गया है कि उनका इस मामले में कुछ लेना देना नहीं है। कुछ लोग अपने निजी लाभ के उद्देश्य से इस तरह की बातें कर रहे हैं।

गत 8 दिसंबर को शालीमार बाग स्थित मैक्स अस्पताल का दिल्ली सरकार ने लाइसेंस रद कर दिया था। जीवित बच्चे को मृत बताने और पैकेट में सील करके परिजनों को सौंपने के मामले में यह कार्रवाई की गई थी।

उधर दिल्ली सरकार की 8 दिसंबर को हुई कार्रवाई के बाद अस्पताल प्रशासन इस मामले को लेकर दिल्ली सरकार के वित्तीय आयुक्त के पास गया था। वित्तीय आयुक्त इस तरह के मामले में अपीलीय अथॉरिटी हैं। उन्होंने पहली ही सुनवाई पर लाइसेंस रद किए जाने के सरकार के फैसले पर स्टे लगा दिया। स्टे लगाए जाने के बाद से अस्पताल में सभी व्यवस्थाएं पहले की तरह बहाल हो गई हैं। आप सरकार से बर्खास्त मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा है कि सरकार ने इस मामले में जानबूझ लापरवाही की है। सरकार ने कार्रवाई को लेकर नियमों का पालन नहीं किया, जबकि इस मामले में गोरखपुर अस्पताल में बच्चों की मौत पर योगी सरकार और हरियाणा की खट्टर सरकार की तरह ही अस्पतालों के डॉक्टरों के खिलाफ पहले प्राथमिकी दर्ज कराकर उन्हें गिरफ्तार कराया जाना चाहिए था। उसके बाद सरकार को नियम के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए थी। मगर सरकार ने इस मामले में सिर्फ ड्रामा किया है। जिस वित्तीय आयुक्त ने लाइसेंस बहाल किया है। वह वित्त मंत्री मनीष सिसोदिया के अधीन आते हैं।

from Dainik Jagran

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