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गर्भपात कराने की किशोरी की मांग पर एम्स को दिया परीक्षण का आदेश

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नई दिल्ली। गर्भपात कराने की मांग करने की 15 वर्षीय किशोरी की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने एम्स को मेडिकल बोर्ड गठित कर मामले का परीक्षण करने का आदेश दिया। न्यायमूर्ति एस मुरलीधर व आइएस मेहता की पीठ ने कहा कि मेडिकल बोर्ड 22 दिसंबर तक यह रिपोर्ट पेश करें कि 25 हफ्ते के गर्भ का गर्भपात कराने की सलाह दी जा सकती है। मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी एक्ट की धारा 3 (2)(बी) के तहत 20 सप्ताह के बाद गर्भपात कराना प्रतिबंधित है।

किशोरी ने बुधवार को हाई कोर्ट में शपथपत्र देकर कहा कि वह अपना गर्भपात कराना चाहती है। किशोरी की तरफ से पेश हुए वकील कमलेश कुमार मिश्रा ने दावा कि शुरुआत में पुलिस के प्रभाव में आकर पहले किशोरी ने अपना मन बदल लिया था, लेकिन अब अपनी पढ़ाई को देखते हुए वह गर्भपात कराना चाहती है। इस पर कोर्ट ने कहा कि समय बर्बाद किए बगैर मेडिकल बोर्ड मामले का परीक्षण करे। कोर्ट ने कहा कि मेडिकल बोर्ड अपनी रिपोर्ट 22 दिसंबर तक पेश करे और उस दिन किशोरी अपने परिजनों के साथ मौजूद रहे। ज्ञात हो कि मंगलवार को कोर्ट ने किशोरी से कई बार इस संबंध में पूछा था और उसने अलग-अलग बयान दिया था। कोर्ट ने यह पाया था कि घर छोड़कर अपनी मर्जी से शादी करने वाली किशोरी ने चाइल्ड वेलफेयर कमेटी, एम्स और फिर हाई कोर्ट में हर बार अपना बयान बदला था। बता दें पुलिस ने 27 नवंबर को किशोरी से शादी करने वाले युवक को प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन ऑफ सेक्सुअल ऑफेंस एक्ट के तहत हिरासत में लिया था।

from Dainik Jagran


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